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गर्भावस्था के दौरान इन खतरों से रहें सावधान

गर्भावस्‍था के नौ महीने महिलाओं के लिए बड़े उतार-चढ़ाव वाले होते हैं, इस दौरान महिलाओं को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। तनाव, वजन बढ़ना, सिर में दर्द होना, मॉर्निंग सिकनेस, भूख न लगना, अनिद्रा जैसी कई परेशानी से माहिलाओं का सामना होता है। लेकिन इन सामान्‍य समस्‍याओं के साथ गर्भावस्‍था के इन नौ महीनों में कुछ खतरे भी होते हैं जिनके बारे में गर्भवती महिला को जानना बहुत जरूरी है, जिससे वह गर्भपात की संभावना को रोक सके। इस लेख में विस्‍तार से जानें खतरों के बारे में।

गर्भावस्‍थ के खतरों को पहचानें

  • यह ज़रूरी है कि गर्भावस्‍था के साथ ही आप गर्भावस्‍था के खतरों को पहचान लें। हालांकि चिकित्सक आपको कुछ संकेत बता देंगे जिससे कि आप गर्भावस्‍था के खतरों को पहचान सकेंगे और इन स्थितियों के खतरे को कम कर सकते हैं।
  • लेकिन एक सवाल जो कि हर गर्भवती महिला करती है वो यह है कि तत्काल चिकित्सा के लक्षण और डाक्टर से मिलने तक की प्रत्याशा को अलग कैसे किया जाये। विशेषज्ञ ऐसी सलाह देते हैं कि कुछ ऐसे लक्षणों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
  • गर्भ के तीसरे महीने के दौरान असहनीय सरदर्द, कभी-कभी आंखों से साफ न दिखना, पेट में सूजन और तेज़ दर्द।
  • इस प्रकार के लक्षण ब्लड प्रेशर के बढ़ने से या यूरीन में प्रोटीन की अधिक मात्रा से हो सकते हैं और यह लक्षण अक्‍सर गर्भावस्‍था के 20वें हफ्ते में होती है।

 

फीटल किक पर ध्‍यान दें

 

  • विशेषज्ञ ऐसी सलाह देते हैं कि अगर बच्चा गर्भ में अधिक घूम नहीं रहा है तो इसका अर्थ है कि उसे प्लेसेन्टा से पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन नहीं मिल रहा है।
  • फीट‍ल किक को गिनकर भी आप बच्चे की गति का अंदाज़ा लगा सकते हैं, लेकिन ऐसी कोई निश्चित गिनती नहीं है कि बच्चे को कितनी फीटल किक करना चाहिए। मोटे तौर पर आपको सिर्फ बच्चे की गति पर ध्यान देना चाहए। बच्चे की गति में किसी अजीब परिवर्तन की स्थिति में चिकित्‍सक की सलाह लेना ज़रूरी हो जाता है।

 

गर्भावस्‍था में अधिक पानी आना

 

  • कभी-कभी ऐसा एहसास होता है जैसे यूरीन की जगह पानी आ रहा है, लेकिन यह सिर्फ यूटेरस के सूजे होने और ब्लैडर के भारीपन से होता है। वास्तव में यह अलग-अलग स्थितियों पर निर्भर करता है। कभी-कभी यह भाप की तरह निकलता है।
  • अगर पानी अधिक समय तक निकलता है तो शायद आपका पानी की थैली फट गई और ऐसे में आपको तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।

 

गर्भावस्‍था के दौरान अधिक उल्‍टी और कमजोरी

  • बार-बार इस प्रकार उल्टियों का आना कि आप कोई भी काम ना कर सकें खतरनाक हो सकता है।
  • विशिष्ट विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि ऐसी स्थितियों में आप कुपोषण के शिकार हो सकते हैं। इससे आगे चल कर पानी कि कमी हो सकती है और बच्चे के जन्म के दौरान परेशानियां भी हो सकती हैं।
  • लेकिन ऐसी स्थितियों में हमेशा डॉक्‍टर के सम्पर्क में रहने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञ ऐसी स्थितियों में आपको उपयुक्त आहार लेने का तरीका बता सकते हैं जिससे कि मां और होने वाले बच्चे दोनों का स्वास्थ्य अच्छा रहे।

 

गर्भावस्‍था में फ्लू के संकेत

ऐसा माना गया है कि प्रेग्नेंट महिलाओं में फ्लू का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक रहता है। इसका सामान्य कारण है प्रेग्नेंसी से शरीर का इम्‍यून सिस्‍टम कमजोर हो जाती है। ऐसे में फ्लू से होने वाली परेशानियां भी बढ़ जाती हैं।

फ्लू के सामान्य लक्षण

 

  • डायरिया
  • गले में दर्द
  • सर्दी
  • खांसी और सर्दी
  • कमज़ोरी
  • नाक का बहना
  • उल्टियां आना

 

गर्भावस्‍था में रक्त की कमी

विशेषज्ञ ऐसी सलाह देते हैं कि गर्भावस्‍था के दौरान खून अलग-अलग समय पर अलग परिभाषा देता है। अगर आपको मासिक धर्म के समय दर्द होता है या पेट में बहुत तेज दर्द होता है तो यह अस्थानिक गर्भावस्‍था (ऑक्‍टोपिक) के लक्षण हो सकते हैं। इस तरह का गर्भ तब होता है जब अण्डे यूटरस के बाहर निषेचित हो जाते हैं और इससे शुरुआत के 3 महीनों के दौरान सुस्ती का अनुभव होता है।

  • गर्भावस्‍था के दौरान ब्लीडिंग हमेशा ही एक गंभीर समस्या रहती है लेकिन अगर यह दर्द के साथ होती है तो मिसकैरेज की बहुत अधिक सम्भावना रहती है।
  • गर्भावस्‍थ के दौरान हमेशा ही व्यक्ति स्थितियों को लेकर निश्चिंत नहीं रह सकता।
  • अगर आप बहुत ही असहज महसूस कर रहे हैं तो ऐसे में अपनी आंतरिक भावनाओं को समझें और अपने चिकित्‍सक से सम्पर्क करें।
  • इससे ना केवल आप निश्चित रहेंगे बल्कि आप असुरक्षित लक्षणों को भी पहचान सकेंगे।

गर्भावस्था के दौरान हर महिला को अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है। इस दौरान अगर महिला को किसी तरह की कोई शारीरिक परेशानी होती है या मानसिक समस्या होती है, तो उसका असर होने वाले बच्चे पर भी पड़ता है। कई बार ठीक से देखभाल न होने के कारण या महिलाओं की छोटी-मोटी गलतियों के कारण गर्भपात का भी खतरा हो जाता है। ऐसे में प्रीनेटल केयर यानी गर्भावस्था से पहले की देखभाल बहुत जरूरी है। आइए आपको बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान आपको किन बातों का सबसे ज्यादा ध्यान रखना चाहिए

समय पर पौष्टिक भोजन

दिन में 5 से 6 बार पूरा आहार लें। ज्यादा देर तक भूखी न रहें। स्वस्थ व संतुलित आहार का सेवन करें। आहार में सभी प्रकार के फल, सब्जियों और अनाज को शामिल करें। ज्यादा से ज्यादा रेशे वाली सब्जियां खाएं। बच्चों की हड्डियों, दांतों और मांसपेशियों के निर्माण के लिए कैल्शियम की जरूरत होती हैं। और यह ज़रूरत माँ से पूरी होती हैं । यदि मां गर्भावस्था में भरपूर मात्रा में कैल्शियम युक्त आहार न लें तो बाद में ऑस्टियोपोरोसिस होने की संभावना होती हैं। इसलिए कैल्शियम युक्त आहार जैसे –दूध, दही, पनीर, हरी सब्जियां, ब्रोकोली आदि लेना ज़रूरी है।

गर्भावस्था की दवार्इयां

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को सामान्य से अधिक पोषण की आवश्यकता होती है। इसलिए उन्हें चिकित्सक द्वारा दी गयी दवाओं को समय पर लेना चाहिए। बिना चिकित्सकीय सलाह के कोर्इ भी दवार्इ ना लें, इससे गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। समय समय पर अपना चेकअप करवाते रहें।

पूरी नींद लें

कम से कम आठ घंटे की नींद लें। बहुत अधिक थकाने वाले काम ना करें। अगर आप रात को नहीं सो पा रही हैं तो दिन में अपनी नींद पूरी करें। नींद पूरी लेने से मेटाबॉलिज्म सिस्टम तो ठीक से काम करेगा ही, इस अवस्था में होने वाली थकान भी दूर हो जाएगी।

शराब और सिगरेट का सेवन बंद करना

गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान या एल्कोहल का सेवन खतरनाक है क्योंकि इसका सीधा संबंध बच्चे के स्वास्थ्य पर पड़ता है। इस दौरान प्रोटीन और विटामिन सप्लीमेंट्स के सेवन से परहेज करें और नियमित रूप से डॉक्टर से मिलें। डॉक्टर की सलाह से ही पूरक आहार लें। इसके अलावा अपने आस-पास किसी खतरनाक रासायनिक तत्व के संपर्क में आने से बचें।

सुबह-शाम थोड़ी सैर करें

इसके अलावा, प्रेग्नेंसी के दौरान रोज़ सुबह-शाम सैर करना सबसे आसान एक्सरसाइज़ है। इससे आपके पैरों की मांसपेशियां मजबूत बनी रहेंगी। इससे डिलीवरी में आपको आसानी होगी। अगर आप कोई नया एक्सरसाइज शुरू करना चाहती हैं तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

स्तनपान कराने से लाभ – बच्चे के लिए माँ के दूध के फायदे

माँ का दूध एक नवजात बच्चे के लिए बहुत उपयोगी होता है, बचपन में माँ का दूध जो बच्चा नहीं ले पाता है उसे पूरी तरह से पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं जिसकी वजह से बच्चा अविकसित रहता है। माँ के दूध कई बीमारियों से लड़ने में सक्षम होता है। स्तनपान करना जितना जरूरी बच्चे के लिए होता है उतना भी लाभकारी माँ के लिए भी होता है। स्तनपान करने से महिला में कैंसर जैसे बीमारी से लड़ने की ताकत और मोटापा नहीं होता है। और भी बहुत से फायदे है स्तनपान करवाने के

लिए जिनके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं। जाने किस प्रकार माँ का दूध उसके बच्चे के लिए है फायदेमंद।
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स्तनपान के फायदे – माँ का दूध नवजात बच्चे के लिए 

स्वास्थ्य विभाग द्वारा पता चला है की एक नवजात बच्चे के लिए माँ का दूध बहुत ही लाभकारी होता है न की गाय या भैस का। लगभग ६ महीने तक बच्चे को अपना दूध पिलाने से उसे बहुत उपयोगी पोषक तत्व मिलते है जो कई बीमारियों से लड़ने की छमता रखता है। इसके अलावा दिमाग तेज, हड्डिया मजबूत या कोई अनवांशिक ढीलापन शरीर पर नहीं होता है। हम आपको बता दें की पहले ६ महीने तक अपने बच्चे को अपना ही दूध पिलायें, इसके अलावा कुछ भी नहीं।

बच्चे को दूध कैसे पिलायें

बच्चे को सही तरीके से दूध पिलाना भी बहुत जरूरी है, क्यूंकि अगर कोई चूक हो जाती है तो बीमारिया आने में ज्यादा समय नहीं लगता है। इसलिए सतर्कता से अपने बच्चे को दूध पिलाये और उसे स्वस्थ और निरोगी बनाएं।

  • सबसे अफ्ले अपने पावों को मोड़कर अपनी गॉड में एक तकिया रख लें और यह आरामदायक हो जिससे बच्चे को कोई परेशानी न आये।
  • फिर उसे सिर और गर्दन के बीच एक हाथ और दूसरा उसके हिप्स से आराम से पकड़कर अपनी गोद में लें। ऐसा नहीं की आप गर्दन से पकड़ रहे है इससे उसके सिर पर नुक्सान पहुँच सकता है।
  • अब गर्दन और सिर के निचले भाग से अच्छी तरह पकड़ते हुए उसके मुँह को अपने स्तनों तक ले जाएँ।
  • कोशिश करें कि आपके निप्पल उसके मुँह में अच्छी से आ रहे है।
  • और कम एक स्तन से २० मिनट दूध पिलाये फिर उसके बाद दूसरे स्तन से पिलाये।
  • तब तक बच्चे को दूध पिलायें जब तक वह अपने मुँह से स्तन को छोड़ न दे।
  • ध्यान रखने वाली बात है की आप जब भी स्तनपान करा रहे है तो अपने स्तन के निप्पल की जड़ दो उंगलियों से भली भांति पकड़ लें जिससे आपके बच्चे को अच्छी तरह दूध मिल सके।

स्तनपान करने के फायदे नवजात बच्चे के लिए 

1. माँ का दूध शिशु के विकास में सहायक

माँ के दूध में प्रोटीन, वसा, विटामिन्स और कार्बोहाइड्रेट सही मात्रा में होते है। जो की एक बच्चे की ठीक तरह से विकसित होने में मदद करते है। इसके अलावा माँ के दूध में ल्यूकोसाइट्स हार्मोन और साथ ही एंटीबॉडी, एंजाइम्स मौजूद होते हैं, जो कि नवजात शिशुओं के लिए शुद्ध भोजन का निर्माण करती है। स्तन के दूध में प्रोटीन आसानी से पचा होता है जो कि बीमारियों के संक्रमण से बचता है।

स्तन के दूध में कैल्शियम और आयरन भरपूर मात्रा में होते है जो की हड्डियों को मजबूत और विकास में सहायक होते है। इसके अलावा माँ के दूध में स्वस्थ वसा की मात्रा होती है जो मस्तिष्क, रेटिना और तंत्रिका तंत्र के विकास के लिए जरूरी होता है। माँ के दूध में पाए जाने वाले कैटोज़ कार्बोहायड्रेट, शिशुओ में कैल्सियम, मैग्नीशियम और अन्य खनिजों के अवशोषण को बेहतर बनाता है।

2. स्तनपान प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ा देता है

कम से कम छैः महीनो तक स्तनपान करने से बच्चो में एलेर्जी, एक्जिमा और अस्थमा जैसी बीमारियों से रोकता है। जोकि जन्म देने से पहले गर्भ में ही उत्पन्न हो जाती है। माँ के दूध में कम वसा और उच्च प्रोटीन की मदद से यह बच्चे के प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं और लिम्फोइड टिस्शु पर सकारातमक प्रभाव डालता है। यह बच्चो को रोगाणु, वैक्टीरिया, वायरस और अन्य रोगो से बचता है।

3. बुद्धि में विकास होता है 

माँ के दूध की ताकत कौन नहीं जनता है, अगर माँ का दूध ६ महीने या उससे अधिक पिया गया हो तो बच्चे के दिमाग का अच्छा खासा विकास होता है। माँ के दूध में वसीय अम्ल पाए जाते है जो जवजात शिशु के लिए बहुत जरूरी होते है। इसलिए बच्चे को अधिक बुद्धिमान बनाने के लिए पहले ६ महीने माँ का ही दूध पिलाये। उसके बाद आप गाय का दूध भी पीला सकते है। क्यूंकि गाय के दूध में भी काफी प्रोटीन और विटामिन्स होते है।

4. हड्डियाँ होती है मजबूत

माँ का दूध हर तरफ से शिशु के लिए लाभदायक होता है क्यों भी न हो इसमें प्राकृतिक रूप से ही इतने विटामिन्स और प्रोटीन होते है जो बगैर किसी खाना पीने के भी बच्चे को मिल जाते है। माँ का दूध बच्चे के हड्डियों को मजबूत और बीमारियों से बचता है। यह मसल्स को भी मजबूत करने में सहायक होता है। इससे कोशिकाएं भी मजबूत होती है और नए कोशिकाओं का भी निर्माण आसानी से होता है जिससे शिशु का विकास जल्दी ही हो जाता है।

5. स्तनपान आँखों की तीव्रता के लिए

नवजात शिशु के लिए स्तनपान करना बहुत ही फायदेमंद होता है, यह आँखों की रौशनी को भी बढ़ने में मददगार होता है। माँ के दूध में फटी एसिड और ध होता है जो बेहतर दृष्टि और एकग्रता के लिए महत्वपूर्ण होता है। इसके अलावा यह आँखों में होने वाले किसी भी बीमारी से लड़ने की छमता रखता है।

6. स्तनपान पाचन तंत्र को स्वस्थ बनता है

छोटे बच्चो को कई सारी परेशानिया होती है जिन्हें वे बया नहीं कर सकते है इसलिए भगवन ने पहले ही माँ का दूध बच्चे के लिए बनाया जिससे उसे सम्पूर्ण पोषक तत्व मिले और बीमारियों या परेशानियों से बचे। छोटे बच्चो का पेट ख़राब, उलटी आना जल्दी बुखार आ जाना, ठण्ड लग जाना सारी बीमारियों के लिए स्तनपान बहुत लाभकारी होता है।

7. स्तनपान कैंसर से बचाता है

स्तनपान जिस प्रकार बच्चे के लिए बहुत लाभदायक है उसी तरह यह माँ के लिए भी बहुत उपयोगी होता है। स्तनपान करने से माँ में ब्रैस्ट कैंसर होने के खतरे बहुत कम हो जाते है, साथ ही साथ या बच्चे को भी कैंसर से बचता है। माँ के दूध में ट्रेल नमक प्रोटीन पाया जाता है जो लिम्फोब्लास्टिक नमक रोगो से बचाव करता है।

8. मोटापा कम करने में सहायक

शोध से पता चला है कि माँ के दूध से मोटापा कई हद्द तक कम होता है। गर्भवस्था के बाद मोटापा होना आम बात है लेकिन इसे कम करने में स्तनपान करवाना अति आवश्यक होता है। एक माँ को रोजाना ४०० से ५०० कैलोरी की जरूरत होती है लेकिन स्तनपान कराने से ५०० कैलोरी खर्च हो जाती है जो की एक गर्भवती महिला के लिए बहुत जरूरी है।

9. दांतों में छय रोग करे कम

नवजात शिशु के जन्म के बाद बहुत सारी बीमारिया आने शुरू हो जाते है इसका प्रमुख कारण है की बच्चे का शरीर कमजोर और नाजुक होता है जिसपर बीमारिया जल्दी ग्रसित हो जाती है। नवजात बच्चे के दांत बहुत ही कमजोर होते है इनमे छय रोग दूर करने के लिए माँ का दूध काफी लाभदायक होता है। यह जबड़े की हड्डी और ऊपरी वायु मार्ग की मांशपेशियों को भी मजबूत करता है।

10. मधुमेह का रोग होता है दूर

मधुमेह से ह्रदय रोग, गुर्दे में समस्या, तंत्रिका तंत्र, पैरो में कमजोरी होती है जो की नाबालिक बच्चे के शरीर के लिए बहुत नुकसानदायक है। मधुमेह माँ और बच्चे दोनों को छाती पहुंचा सकता है। इसलिए इस रोग को दूर करने के लिए स्तनपान बहुत जरूरी है।

निष्कर्ष: हम आपसे यही कहना चाहेंगे की बच्चे तो पहले 6 महीने स्तनपान जरूर कराये जिससे आपका बच्चा बनेगा हृष्ट-पुष्ट और निरोगी। अगर आपके पास कोई समस्या हो तो आप नीचे कमेंट बॉक्स के जरिये हमसे सवाल कर सकते है। हमसे जुड़ने के लिए हमारे Facebook Page को like करें।